क्या अब किसानों को यह प्रमाण-पत्र थाने से लेना पड़ेगा कि वे किस वाहन में चलेंगे : ( भाकीयू ) राजवीर लवानिया

आगरा। खंदौली में एक दरोगा द्वारा किसानों को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष राजवीर लवानिया ने कहा कि किसानों का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई किसान अपनी मेहनत और ईमानदारी की कमाई से बेहतर जीवन जीने की कोशिश करता है तो कुछ लोगों को यह हजम नहीं होता। किसान दिन-रात खेत में मेहनत करता है, देश का पेट भरता है और यदि वही किसान सम्मान के साथ जीवन जीना चाहता है तो उस पर सवाल उठाना दुर्भाग्यपूर्ण है। राजवीर लवानिया ने कहा, “क्या अब किसानों को यह प्रमाण-पत्र भी थाने से लेना पड़ेगा कि वे किस वाहन में चलेंगे? यदि कोई किसान Toyota Fortuner में बैठे तो क्या वह किसान नहीं रहेगा? क्या किसान हमेशा फटेहाल दिखाई दे तभी उसे किसान माना जाएगा?”
उन्होंने कहा कि देश के किसानों को गरीबी और मजबूरी के प्रतीक के रूप में दिखाना गलत मानसिकता है। किसान मेहनत करता है, उत्पादन करता है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। किसान सम्मान से जीना चाहता है, भीख नहीं मांगता। लवानिया ने यह भी कहा कि आलू की स्थिति जितनी खराब बताई जा रही है, वास्तव में उतनी नहीं है। कुछ यूट्यूबर और राजनीतिक लोग इसे बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आलू उत्पादक किसानों का भविष्य सुरक्षित है और आलू पर किसी प्रकार का संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत लगातार यह कहते रहे हैं कि देश की नीतियां धीरे-धीरे बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हित में बनती जा रही हैं और किसानों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। ऐसे बयान उसी सोच को उजागर करते हैं। अंत में राजवीर लवानिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों का अपमान बंद होना चाहिए, अन्यथा देश का किसान लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देना जानता है। किसान किसी के रहमो-करम पर नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और अपने अधिकारों के बल पर जीता है।



