
*एत्मादपुर विधानसभा में सपा के टिकट पर घमासान तेज, ब्राह्मण vs बघेल में फंसा पेंच – यादव वोट बैंक सिर्फ 28 हजार*
भूपेंद्र भारद्वाज मौत
भारत TV
*आगरा – एत्मादपुर:* यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले ही आगरा की हॉट सीट एत्मादपुर में सियासी पारा हाई हो गया है। समाजवादी पार्टी में टिकट की दावेदारी को लेकर सभी की निगाहें टिकी हैं। कार्यकर्ताओं और जनता के बीच चर्चा है कि इस बार सपा किस समाज को साधेगी और इतिहास बदल पाएगी या नहीं?
*सपा में दो बड़े चेहरे चर्चा में -*
*1. ब्राह्मण समाज से – विष्णु प्रधान और मनोज शर्मा*
ब्राह्मण वोटों को साधने के लिए दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
*विष्णु प्रधान:* जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। जनता के बीच पकड़ मजबूत मानी जाती है। कहा जाता है कि बच्चा-बच्चा पहचानता है और सभी जातियों में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं।
*मनोज शर्मा:* किसान नेता के रूप में पहचान है। किसानों के हित में कई आंदोलन कर चुके हैं। जमीनी नेता के तौर पर उनकी भी दावेदारी काफी मजबूत है।
*2. बघेल समाज से – सर्वेश बघेल*
बघेल समाज से सर्वेश बघेल का नाम सबसे पहले चर्चा में है। बघेल वोट बैंक करीब 50 हजार के आसपास माना जाता है।
तमाम लोग प्रचार में लगे हैं, लेकिन हाईकमान किसे आशीर्वाद देगी, यह समय बताएगा। क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि कुछ अन्य नए चेहरे भी घूम रहे हैं, लेकिन समाज में उनका कोई अस्तित्व नहीं है, उन्हें समाज भी नहीं जानता। बिना पकड़ के वोट कहां से मिलेगा?
*जातीय समीकरण – सपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती और यादव वोट बैंक का सच*
एत्मादपुर सीट का जातीय गणित बहुत उलझा हुआ है। ये सीट एससी बाहुल्य है, यादव बाहुल्य नहीं।
– एससी – लगभग 1 लाख
– क्षत्रिय (ठाकुर) – 70 से 90 हजार
– ब्राह्मण – 60 हजार
– बघेल – 50 हजार
– मुस्लिम – 35 हजार
– कुशवाहा – 30 हजार
– *यादव – 28 हजार*
– जाट – 22 हजार
– वैश्य – 15 हजार
*सपा का कोर वोट बैंक -*
सपा का असली कोर वोट सिर्फ *यादव (28 हजार) + मुस्लिम (35 हजार) = 63 हजार* ही है।
एत्मादपुर में कुल 4.50 लाख वोटर हैं और जीतने के लिए 1 लाख 30 हजार से ज्यादा वोट चाहिए। 63 हजार से चुनाव नहीं जीता जाता। इसीलिए सपा को 70 हजार एक्स्ट्रा वोट किसी और समाज से जोड़ना ही पड़ेगा।
*राजनीतिक गणित क्या कहता है?*
*अगर सपा बघेल समाज को टिकट देती है -* तो 50 हजार बघेल वोट मिलेगा, पर क्षत्रिय समाज का 70 हजार वोट नाराज होकर भाजपा की तरफ चला जाएगा। ब्राह्मण और अन्य जातियों से भी वोट कम मिलेगा, सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा।
*अगर ब्राह्मण समाज से प्रत्याशी होता है, तो टक्कर कांटे की होगी -* क्योंकि ब्राह्मण 60 हजार + मुस्लिम 35 हजार + यादव 28 हजार = 1.23 लाख तो सीधा हो जाता है। विष्णु प्रधान और मनोज शर्मा जैसे प्रत्याशी ऐसे हैं जो ब्राह्मण के साथ-साथ सर्व समाज में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं। जनता भी कह रही है – “जनता के बीच का दावेदार चाहिए, जिसकी राजनीतिक पकड़ मजबूत हो।”
*सीधा सा गणित है – अगर इस बार ब्राह्मण प्रत्याशी नहीं तो भाजपा की दमदार भागीदारी तय मानी जा रही है।*
*पिछला आंकड़ा क्या कहता है?*
2022 के विधानसभा चुनाव में एत्मादपुर सीट पर सपा ने *डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान* को प्रत्याशी बनाया था। उस चुनाव में भाजपा से *डॉ. धर्मपाल सिंह ने 1,43,052 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।* बसपा से प्रबल प्रताप को 94,042 वोट मिले थे और सपा गठबंधन तीसरे स्थान पर रह गया था।
इससे पहले का इतिहास देखें तो 2017 में भाजपा के राम प्रताप सिंह चौहान ने जीत दर्ज की थी, इससे पहले इस सीट पर भाजपा कभी नहीं जीती थी। 2012 और 2007 में बसपा का कब्जा रहा था।
अब देखना होगा कि 2027 में सपा इतिहास बदलने के लिए किस चेहरे पर दांव लगाती है – क्या वो 50 हजार वाले बघेल समाज पर भरोसा करेगी या 60 हजार ब्राह्मण वोट के साथ सर्व समाज का नया समीकरण बनाएगा



