वृक्षारोपण से प्रसन्न होते हैं सूर्य भगवान

आगरा। ‘भगवान सूर्य प्रकृति का पोषण करते हैं। बिना सूर्य के प्रकाश के प्रकृति में हरियाली नहीं हो सकती। भगवान सूर्य को वृक्षों को देखकर अति प्रसन्नता होती है। भविष्य पुराण में स्वयं भगवान सूर्य कहते हैं कि उन्हें पुराण कथा श्रवण तथा वृक्षारोपण अत्यंत प्रिय है। अतः भगवान सूर्य की प्रसन्नता के लिए अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण करें ।’ भविष्य पुराण कथा प्रवचन के पांचवें दिन कथावाचक डॉ दीपिका उपाध्याय ने उक्त उद्गार व्यक्त किये।
श्रीगोपालजी धाम, दयालबाग में चल रही भविष्य पुराण कथा प्रवचन श्रंखला में आज भगवान सूर्य की पूजा पद्धति के साथ ही भारत वर्ष के विभिन्न राजवंशों का वर्णन हुआ। कथावाचक ने बताया कि मनुष्य के कर्म, उसका दृष्टिकोण तथा उसकी इच्छाएं ही उसके जीवन की दिशा निर्धारित करती हैं। इन्हीं के आधार पर मनुष्य का अगला जन्म भी निर्धारित होता है ।
कथावाचक ने आगे कहा कि मनुष्य जीवन में सदैव यही विचार करता है कि उसे क्या प्राप्त नहीं हुआ। यदि इसके स्थान पर वह, जो प्राप्त हुआ है, उसका उपभोग करे तो उसका जीवन आनंदमय हो जाएगा।
कथा के विश्राम के उपरांत गुरुदीपिका योगक्षेम फाउंडेशन के द्वारा प्रसाद वितरण किया गया तथा अन्य व्यवस्थाएं भी संभाली गई। फाउंडेशन की ओर से सूचित किया गया कि सोमवार को कथा पूर्ण विश्राम लेगी। इस अवसर पर सृष्टि के जीवनदाता भगवान सूर्य का विविध उपचारों से अर्चन किया जाएगा तथा भंडारे का आयोजन किया जायेगा।



