
*दीपावली है, आ जाओ साहब बुला रहे हैं… कॉलोनी काटने वालों के पास जा रहे फोन*
भूपेंद्र भारद्वाज मौत
*आगरा।* दीपावली का त्योहार आते ही यमुना पार में अवैध कॉलोनी काटने वाले बिल्डरों के पास फोन घनघनाने लगे हैं। “साहब बुला रहे हैं, आ जाओ, दीपावली है” – इस एक फोन कॉल का मतलब पूरा क्षेत्र समझता है। समय से लिफाफा पहुंच जाता है और अवैध कॉलोनी काटने का आशीर्वाद मिल जाता है। पूरे आगरा का यही हाल है कॉलोनी काटने वाले बिल्डरों के फोन और विकास प्राधिकरण के कर्मचारियों की कॉल डिटेल निकाली जाए तो पूरा खुलासा सामने निकल कर आ जाएगा सूत्रों की माने तो मोटी रकम लिफाफा के अंदर पहुंचती है
यह पहली बार नहीं सभी त्योहारों पर यही खेल होता है
*बिना 143, बिना ADA के काटी जा रही हैं कॉलोनियां*
यमुना पार के *एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र* में धड़ल्ले से अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं।
जिन कॉलोनियों में –
– *143 (कृषि भूमि से अकृषि में रूपांतरण) नहीं है*
– *आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) से ले-आउट का नक्शा पास नहीं है*
– न सीवर लाइन है, न पार्क, न सड़क का मानक है
फिर भी खेतों में प्लॉटिंग कर 25-30 गज के टुकड़ों में बेचे जा रहे हैं।
*जहां पैसा नहीं पहुंचा, वहीं चला बुलडोजर*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि – जिसका लिफाफा समय से पहुंच जाता है, उसकी कॉलोनी पर कोई कार्रवाई नहीं होती। और जिसका लिफाफा नहीं पहुंचता, उसी पर ADA का बुलडोजर चल जाता है, दिखावे के लिए 2-4 दीवारें गिरा दी जाती हैं। मोटी रकम पहुंच जाती है फिर चुपचाप बैठ जाते हैं ऐसी तमाम कॉलोनी है जहां बुलडोजर चलाया गया था मोटी रकम पहुंचाने के बाद फिर निर्माण कार्य शुरू हो गया
*इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा अवैध कटान:*
टेढ़ी बगिया, छलेसर, एत्मादपुर कस्बा, बरहन, आवल खेड़ा, मुढ़ी चौराहा और खंदौली क्षेत्र। यहां रोजाना जेसीबी से खेत समतल कर सड़कें डाली जा रही हैं और बैनर लगाकर “आबादी के पास प्लॉट” के नाम पर भोली-भाली जनता को लूटा जा रहा है।
पूरा गोवर्धन पटवारी नगला नेहरा ने, लोधी बास अगरिया नगला चंदन आबिद्दगढ़ इन क्षेत्रों में भी काटी जा रही है कालोनियां प्रॉपर्टी डीलर जमीन का सौदा कर लेते हैं फिर किसान करते हैं रजिस्ट्री 143 ही नहीं करते पावर टोनी कर लेते हैं या कुछ जमीन का बैनर अपने नाम करते हैं फिर टुकड़ों में किसानों से रजिस्ट्री कराते रहते हैं जमीनों का एग्रीमेंट करने के बाद कॉलोनी काटना प्रारंभ कर देते हैं किसान के नाम ही 143 कराई जाती है उसके बाद मोटी रकम कॉलोनी काटने वाले दलाल वसूलते हैं तमाम मुकदमे इसी मामले को लेकर लिखे गए हैं जब पैसा लेकर कॉलोनी काटने वाले फरार हो गए तो किसान के पास पैसा नहीं पहुंचा और लोगों को जमीन तक नहीं मिली
भोले-भाले किसान और मजदूर वर्ग के लोग सस्ते के चक्कर में इन कॉलोनियों में फंस जाते हैं। बाद में न रजिस्ट्री होती है, न दाखिल-खारिज। बीते दिन तहसील समाधान दिवस में सैकड़ो ग्रामीण हंगामा करने पहुंचे उनका आरोप था के एक बिल्डर द्वारा कालोनी काटी गई लेकिन अभी तक पानी बिजली उपलब्ध नहीं कराई गई है और काटने के बाद रफू चक्कर हो गया यह हाल एत्मादपुर का ही नहीं पूरे आगरा जिले की सभी तहसीलों का है कॉलोनी काटने वाले बिल्डर इसी तरह जनता को फसाने में लगे हुए हैं जहां तक की सरकारी जमीनों को भी अवैध रूप से बेच दिया है इनके खिलाफ कौन कार्रवाई करेगा
*बड़ा सवाल -*
1. जब इन कॉलोनियों के पास 143 ही नहीं है तो रजिस्ट्री कैसे हो रही है?
2. ADA और तहसील प्रशासन की आंखों के सामने ये कॉलोनियां कैसे कट रही हैं?
3. हर त्योहार पर लिफाफा कहां और किसके पास पहुंचता है?
4. क्या एत्मादपुर की इन अवैध कॉलोनियों की SIT जांच होगी?
क्षेत्र के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंडलायुक्त आगरा से मांग की है कि यमुना पार की सभी अवैध कॉलोनियों की ड्रोन सर्वे कराकर जांच कराई जाए और दोषी बिल्डरों व संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।


