
*एत्मादपुर तहसील समाधान दिवस बना औपचारिकता, नहीं हो रहा समस्याओं का समाधान*
*एत्मादपुर, आगरा।*
शासन के आदेश पर हर महीने आयोजित होने वाला तहसील समाधान दिवस एत्मादपुर में सिर्फ कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है। किसानों और फरियादियों का आरोप है कि थाने और तहसील से बिना समस्या का समाधान किए ही सिर्फ प्रार्थना पत्र पर निस्तारण की रिपोर्ट लगा दी जाती है।
*जमीनी विवादों में सालों से चक्कर*
फरियादियों का कहना है कि जमीनी विवाद, चकबंदी, वरासत और राजस्व से जुड़े मामलों में लोग कई-कई वर्षों से तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। समाधान दिवस में प्रार्थना पत्र तो ले लिया जाता है, लेकिन मौके पर कोई टीम नहीं जाती। बाद में रिपोर्ट लगा दी जाती है कि “मौके पर जाकर समझा दिया” या “कोर्ट के माध्यम से मुकदमा डाला गया है”।
*किसानों ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप*
समाधान दिवस में पहुंचे कई किसानों ने तहसील और थाना स्तर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि बिना लेन-देन के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। लेखपाल से लेकर थाने तक हर जगह पैसा मांगा जाता है।
*पार्टी के नेता भी लगा रहे चक्कर*
हैरानी की बात ये है कि सत्ता पक्ष से जुड़े नेता और कार्यकर्ता भी अपनी समस्याओं को लेकर तहसीलों के चक्कर लगा रहे हैं। जब नेताओं की ही नहीं सुनी जा रही तो आम किसान की क्या सुनी जाएगी, ये सवाल हर किसी के मन में है।
*आगरा की तहसीलों-थानों का बुरा हाल*
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ एत्मादपुर ही नहीं, आगरा की लगभग सभी तहसीलों और थानों का यही हाल है। समाधान दिवस, थाना दिवस सब सिर्फ फोटो खिंचवाने और रजिस्टर भरने तक सीमित रह गए हैं।
फरियादियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि तहसील समाधान दिवस और सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की आख्या की जमीनी स्तर पर जांच कराई जाए और झूठी रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।



