
अंग्रेजों ने अपने आर्थिक हितों की पूर्ति के लिए भारत के स्थानीय और कुटीर उद्योगों को बर्बाद कर दिया था। वह भारत से रॉ मैटिरियल ब्रिटेन ले जाते थे। फिर वहां से बने उत्पाद को भारत में बेचते थे। उनके इस व्यापारिक स्वार्थ पूर्ति में भारत के गॉव गांव तक संचालित स्थानीय उद्योग बाधक थे। अंग्रेजों ने इनको बंदी की कगार पर पहुंचा दिया था। स्वतंत्रता संग्राम में स्वदेशी का विषय अंग्रेजों की कुटिल नीति के विरोध में ही शामिल किया गया था। महात्मा गांधी का चरखा इसका प्रतीक था। इसके साथ ही उन्होंने ग्राम स्वराज की परिकल्पना की थी। उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार ने स्वदेशी,स्वच्छता और ग्राम स्वराज की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए है। गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया। सरकार गांवों को स्वावलम्बन का आधार बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के गांवों में ग्राम सचिवालयों का गठन किया गया है। ग्राम सचिवालय के माध्यम से तकनीक का उपयोग करते हुए ग्रामीणों को उनके गांव में ही विभिन्न नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ग्राम सचिवालयों के माध्यम से चार से सात लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार प्राप्त हो रहा है। स्वदेशी और स्वावलम्बन के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए एक जनपद, एक उत्पाद जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। लोकल को ग्लोबल बनाने का लक्ष्य हासिल किया गया। स्वदेशी के साथ स्वावलम्बन का आधार कायम हो रहा है। आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में उत्तर प्रदेश सर्वाधिक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। स्वच्छ भारत अभियान में भी उत्तर प्रदेश ने कीर्तिमान स्थापित किया है। सर्वाधिक शौचालयों का निर्माण किया गया। इसके साथ ही अन्य प्रयास किए गए। इसके फलस्वरूप पूर्वी उत्तर प्रदेश को इंसेफेलाइटिस त्रासदी से मुक्त किया गया।
उत्तर प्रदेश ने दिखा दिया कि स्वच्छ भारत अभियान स्वस्थ भारत की आधारशिला है। इसने स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई। नारी गरिमा को सम्मान मिला।



